कविता: प्यार में एतबार के लिए, उस प्यार का इकरार तो ज़रूरी है न – जयनंद गुर्जर

सुनो, शायद हम तब मिलेंगे जब हमारे एक दूसरे से मिलने और प्यार करने की सारी संभावनाएं खत्म हो जाएंगी। एक कविता, जो इस प्यार और एतबार के करार को थोड़ा नजदीक से देखने की कोशिश करती है! Continue reading कविता: प्यार में एतबार के लिए, उस प्यार का इकरार तो ज़रूरी है न – जयनंद गुर्जर

कविता: सब कुछ, थोड़ा बिखरा बिखरा सा – जयनंद गुर्जर

अक्सर बिखरी चीज़ों में कुछ बिखरा हुआ मिल जाता है! एक कविता, उसी बिखरेपन को समझते हुए। Continue reading कविता: सब कुछ, थोड़ा बिखरा बिखरा सा – जयनंद गुर्जर

कविता: कभी किसी का फोन आए, तो उठा लिया करना – जयनंद गुर्जर

कभी किसी का फोन आए, तो उठा लिया करो। अक्सर एक फोन कॉल जिंदगी बदल सकता है। कहने को एक कविता है, तुम इसे कहानी समझना। पढ़ना ज़रूर। Continue reading कविता: कभी किसी का फोन आए, तो उठा लिया करना – जयनंद गुर्जर

भली लड़कियां बुरी लड़कियां: एक नजर दिल्ली पर, एक जद्दोजहद वाला नज़रिया

वह किताबें दिल के बड़े करीब होती है, जो आपको सोचने पर मजबूर करे, और अक्सर लिखने को भी। “भली लड़कियां बुरी लड़कियां” अनु सिंह चौधरी द्वारा लिखित उपन्यास एक ऐसी ही किताब, ऐसी ही कहानी है! Continue reading भली लड़कियां बुरी लड़कियां: एक नजर दिल्ली पर, एक जद्दोजहद वाला नज़रिया

कविता: एक किताब खुलेगी, एक पन्ना पलटेगा – जयनंद गुर्जर

एक कविता में एक किताब, एक पन्ना, एक कहानी और एक किरदार, अपने आप में एक पूरी दास्तान। Continue reading कविता: एक किताब खुलेगी, एक पन्ना पलटेगा – जयनंद गुर्जर

मातृभाषा हिंदी!

ये जो भाव दिल की धारा से निकलकरपन्नों की धरा पर आते है ना, ये अपने साथ भावों के अलावा लाते है कुछ जज़्बात, कुछ आशाएं, कुछ उम्मीदें, कुछ अपनापन और ये अपनापन जब एक दिल से निकलकरदूसरे दिल में अपनी राह बनाता है ना,प्यार का संगम वहीं होता है,और इस संगम की साक्षी, सखी … Continue reading मातृभाषा हिंदी!

कविता: लोग नहीं समझते है

जिंदगी के सफ़र में हम लोगों से टकराते है,
पर हर दफा लोग हमें कहां समझ पाते हैं!
पढ़िए यह कविता और जाने इस बात के कुछ पहलू,
दिल की आवाज में! Continue reading कविता: लोग नहीं समझते है

प्राची त्रेहन द्वारा लिखा गया उपन्यास “तुम से मुझ तक” की समीक्षा

इस कहानी को सिर्फ एक श्रेणी में बांध देना, इस कहानी के साथ नाइंसाफी और बेईमानी होगी।

प्राची त्रेहन द्वारा लिखित ये उपन्यास, अपने सफ़र में कई पहलुओं को होकर गुज़रता है। इस किताब के बारे में विस्तार से जानने के लिए, पढ़ते रहिए यह किताब समीक्षा। Continue reading प्राची त्रेहन द्वारा लिखा गया उपन्यास “तुम से मुझ तक” की समीक्षा

सुना है आजकल तुम खत लिखने लगे हो!

आजकल कोई खत लिखने लगा है, पर वह खत कभी कहीं पहुंचते क्यों नहीं? क्या होता है उन खतों का? जानने के लिए पढ़ते रहिए इस कविता को! Continue reading सुना है आजकल तुम खत लिखने लगे हो!

मनोज रंजन त्रिपाठी की किताब कोड काकोरी की समीक्षा

मीडिया जगत के जाने माने शख़्सियत मनोज रंजन त्रिपाठी जी की पहली किताब – कोड काकोरी की समीक्षा Continue reading मनोज रंजन त्रिपाठी की किताब कोड काकोरी की समीक्षा

कहानी: ज़िंदगी के रंग

To read in English: click here “हा.. हा.. हा… अरे!  देखो तो उसे, वो तो गुड़ियों से खेल रहा है। और देखो तो ज़रा, उसका कमरा भी तो पूरा गुलाबी रंग का है। मैं तो उलझन में हूँ कि ये लड़का भी है या फिर…. “शिवानी ने श्रद्धा से अनमोल की तरफ इशारा करते हुए … Continue reading कहानी: ज़िंदगी के रंग

किताब समीक्षा : हौसले की ऊंची उड़ान

कितना अजीब है ना, हम सालों तक किसी चीज़ को ढूंढने की कोशिश करते है और वो हमारे हाथ नहीं लगती। और कभी कभी एक झटके में किसी को कही हुई बात के एक वाक्य में हमें हमारी परेशानी के हर हल मिल जाते हैं और वह भी जिसे हम ढूंढने की कोशिश करते हैं। … Continue reading किताब समीक्षा : हौसले की ऊंची उड़ान

रोशनी

अंधकार जब पैर फैलाकर मन में घर कर जाता है।हर तरफ़ घनघोर तमस हो, दिल का तेज खो जाता है। मंज़िल दिखती नहीं सामने, सब धुंधला हो जाता है।संकट की विकट स्थिति में जब मन विचलित हो जाता है। तब दिया एक जलता दूर कहीं, मन में ढांढस लाता है।दीपोत्सव में दीप प्रज्ज्वलित, मन का … Continue reading रोशनी

मातृभाषा

कुछ जज़्बात होते हैं जिन्हें कितने भी शब्दकोशों का उपयोग कर लो,अपनी मातृभाषा के अलावा किसी दूसरी भाषा में नहीं जता सकते। जैसे जो भाव मां के लिए ममता शब्द में उभर कर आते हैं वहां प्यार शब्द फीका पड़ जाता है। जहां पिता का एतबार, वात्सल्य के रूप में उभरेवहां प्यार शब्द सुना-सुना सा … Continue reading मातृभाषा

पीला रंग और किताबें

पीला रंग प्रतीक होता हैविद्या का, ज्ञान का, सुख एवं शांति काऔर किताबें,किताबें प्रतीक नहीं, होती है माध्यमविद्या का, ज्ञान का, सुख एवं शांति का।पीला रंग दर्शाता हैविद्वता, योग्यता, एकाग्रता और मानसिक बौद्धिक उन्नति कोऔर किताबें, दर्शाती नहीं, दिखाती है – मार्ग,विद्वता, योग्यता, एकाग्रता और मानसिक बौद्धिक उन्नति का।पीले रंग और किताबों में कुछ तो … Continue reading पीला रंग और किताबें

कविता: गुरु

शब्दों में आभार देना,फीका सा लगता है।आपके बिना ये जीवन,अकल्पनीय लगता है।आप है तो राह है,बच्चों के जीवन में अनुराग है।आपकी कैसे दू उपमा मैं गुरु,आप ही हमारे जीवन के रसऔर आप ही अलंकार है। ©जयनंद गुर्जर Continue reading कविता: गुरु

कविता : राह और सफ़र

सफ़र लंबा हैमगर रास्ता मत छोड़ना,मंजिल की दौड़ मेंअपनों को मत छोड़ना। रास्ते में मुसीबत होंगीतुम घबराना नहीं,दौड़ना, चलना, रेंगना,बस तुम कभी थमना नहीं। कई बार मंज़िल सामने आकर चली जायेगी,जिंदगी आपको गोल गोल घुमाएगी। पर सब्र रखनाऔर चलते जाना,ये मंज़िल की सड़ककहीं तो लेकर जायेगी। ज़रूरी नहीं किजो होता है वो अच्छे के लिए … Continue reading कविता : राह और सफ़र