कविता: प्यार में एतबार के लिए, उस प्यार का इकरार तो ज़रूरी है न – जयनंद गुर्जर
सुनो, शायद हम तब मिलेंगे जब हमारे एक दूसरे से मिलने और प्यार करने की सारी संभावनाएं खत्म हो जाएंगी। एक कविता, जो इस प्यार और एतबार के करार को थोड़ा नजदीक से देखने की कोशिश करती है! Continue reading कविता: प्यार में एतबार के लिए, उस प्यार का इकरार तो ज़रूरी है न – जयनंद गुर्जर