बारिश
“मां, मुझे कल स्कूल में फीस जमा करनी है। पापा कब पैसे देंगे?” राघव ने अपनी मां से लगातार तीसरे महीने यही सवाल किया।
“बस बेटा, कुछ दिन और रुक जा, देख पापा दिन रात मेहनत करके पैसे जमा कर रहे हैं। जल्द ही पैसे जमा हो जाएंगे और तेरी फीस भी। अब तू तो जानता है ना, जब तक बारिश नहीं हो जाती, तब तक फसल लगना मुमकिन नहीं, और न ही पैसे इकट्ठा होना। जैसे ही इस फसल के पैसे आएंगे, हम तेरी फीस भर देंगे। है ना बेटा?” मां ने एक बार फिर आसमान की ओर देखते हुए इन्द्र देव को याद किया।
“ठीक है मां, मैं स्कूल वालों से बात करके उनसे कुछ दिन का समय और मांगने की बात करूंगा।”
राघव एक ग्यारह वर्ष का लड़का है। उसके परिवार में तीन सदस्य हैं। वह खुद, उसकी मां सरिता और उसके पिता राजीव। तीन वर्ष पूर्व ही उसकी बहन की मृत्यु भूकमरी के कारण हो गई थी क्योंकि उस वर्ष अच्छी बारिश न होने की वजह से अच्छी फसल नहीं हो पाई और उनके पास खाने के लिए कुछ भी नहीं बचा था। उनका परिवार अपनी रोज़ी रोटी के लिए अपने पिता की खेती पर निर्भर है एवं उनके पास केवल तीन एकड़ ज़मीन है। उस वर्ष भूकमरी की मार से उस परिवार के तीन सदस्य तो जैसे तैसे बच गए, पर राघव की बहन रेशमा ने दम तोड़ दिया। जैसे तैसे ये तीन वर्ष उन्होंने व्यतीत किए एवं बड़ी मुश्किल से राघव की पढ़ाई जारी रह पाई। लेकिन एक बार फिर तीन वर्ष बाद, बारिश के समय पर न आने के कारण परिवार में फिर से परेशानी का माहौल है एवं सबकी नज़रों में एक बार फिर रेशमा की वो आंखें आ जाती है, जो मृत्यु से पूर्व थी, जिसमें जीने ली ललक तो थी, पर जीने का सहारा नहीं।
जैसे ही रात में राजीव घर आए, सरिता ने उनसे पूछा, “क्या आज आस पास के गांवों में बारिश हुई या वहां भी यही हाल है?”
“आज पास के एक गांव में थोड़ी सी बारिश तो हुई थी, पर बाकी के गावों में अभी तो हमारे जैसे ही हाल है।” राजीव ने कहा।
“पापा, पापा, बारिश कब होगी, मुझे भी बारिश में नहाना है, मस्ती करनी है, कीचड़ में क्रिकेट खेलना है और बहुत मस्ती करनी है।” राघव ने अपने पापा कि गोद में जाते हुए कहा।
“जल्दी होगी बेटा, बहुत जल्दी होगी। जब भी बारिश हो तो तुम उसमें अच्छे से भीगना, मस्ती करना, धमा चौकड़ी करना। ठीक है। और देखना बेटा, बारिश के बाद हमारे खेत में फसल लगेगी, अनाज उपजेगा, खेत लहराएगा और अच्छी बरकत होगी तो में जल्दी ही तेरी फीस जमा करवा दूंगा। फिर तुझे अभी नये कपड़े भी तो दिलवाना है ना!” राजीव ने खुशी खुशी कहा।
पर वो असल में अंदर से कितना खुश था, यह तो राजीव और सरिता दोनों ही जानते थे। राघव को सुलाकर, वे दोनों अपने छोटे से मकान के एक कमरे से बाहर आ जाते है।
“क्या ज़रूरत थी राघव को नए कपड़े के सपने दिखाने की। अभी तो घर में खाने के लिए सामान नहीं है और आप उसको कभी पूरे ना हो पाने वाले सपने दिखा रहे हो। कितना निराश होगा वो, अगर अब आपने उसे नए कपड़े नहीं दिलवाए तो।” सरिता अपने घर की परिस्थितियों को देखते हुए कहती है।
” तो मैं और करता भी क्या सरिता। दो साल हो गए उसे नए कपड़े दिलवाए हुए, वहीं पुराने कपड़े वो पिछले दो सालों से पहन रहा है। पिछले साल तो कैसे भी करके उसे समझा दिया था, पर इस साल अगर मैं खुद उससे नहीं बोलता, तो मुझमें इतनी हिम्मत नहीं है, कि जब वो मुझसे नए कपड़े के बारे में पूछे तो मैं उसे जवाब दे पाऊं। इससे अच्छा है कि मैंने ही उसे बोल दिया, अब कम से कम वो मुझसे पूछेगा तो नहीं।”
“पर आप पैसे लाओगे कहां से। अभी तो खाने के लिए कुछ है नहीं, फिर उसकी फीस भरनी है और अब ये कपड़े। अगर पैसे न हो, तो हम उसको सरकारी स्कूल में भी तो भेज सकते है ना।” सरिता ने कहा।
“नहीं सरिता, ऐसा नहीं हो सकता। तुम तो जानती ही हो कि सरकारी स्कूल में सिर्फ एक शिक्षक है और वो भी बच्चों को पढ़ाने की जगह उनसे बस साफ सफाई करवाता है। हम तो नहीं पढ़ सके, पर देखना में उसकी पूरी पढ़ाई का इंतजाम कर लूंगा। फिर उसके लिए चाहे मुझे कुछ भी क्यों न करना पड़े। चलो अब बहुत रात भी हो गई है, अंदर चलते है। कहीं राघव की नींद खुल गई, तो परेशानी ही जाएगी।” राजीव ने सरिता को अंदर ले जाते हुए कहा।
जैसे तैसे कुछ दिन और गुज़र गए। पर अब भी बारिश का कोई नामोनिशान नहीं था। घर में अब खाने का सामान भी लगभग खत्म हो चुका था। राघव के स्कूल वाले बार-बार फीस जमा करने के लिए कह रहे थे। दिन गुज़रते जा रहे थे और बारिश अब भी नहीं आ रही थी।
ऐसे ही एक दिन राजीव ने एक अख़बार में पढ़ा कि एक किसान की आत्महत्या करने के बाद मुख्यमंत्री ने उसके परिवार वालों को पचास हजार रूपए दिए। इस खबर को पढ़ने के बाद, राजीव की आंखों के सामने राघव की स्कूल की फीस, घर में खाने की कमी और बच्चों के सपने पूरे ना कर पाने की समस्या आ गई और आ गई ना चाहते हुए भी रेशमा की याद।
उसने कुछ दिन बारिश का और इंतजार किया, लेकिन बारिश का अब भी कोई अता पता नहीं था। उस रात जब वह घर गया, तो उसने राघव को अपने पास बुलाया और उसके साथ जमकर मस्ती की। उसने सोने से पहले सरिता का भी माथा चूमा और फिर सोने चला गया। सरिता को राजीव के बदलते व्यवहार से कुछ चिंता तो हुई फिर उसने सोचा कि इस वक़्त राजीव से बात करना सही नहीं होगा। वह दिन भर के थक गए होंगे, इसलिए वह उनसे कल सुबह बात कर लेगी और वह भी सोने चली गई।
उसी रात राजीव आधी रात को उठता है और सरिता और राघव को चैन से सोते हुए देखता है। वह घर में रस्सी ढूंढता है और वह मिल जाने के बाद वह इस बात की पुष्टि करता है कि सरिता और राघव सोए है या नहीं। जब वह देखता है कि वह दोनों गहरी नींद में है, तो वह दोनों को चूमने के बाद,उन्हें एक आखिरी बार जी भर के देख लेने के बाद, घर से निकल जाता है। घर से निकलते समय उसकी आंखों में आंसू होते हैं।
वह अपने खेत में जाता है और अपने साथ लाई हुई रस्सी को एक मजबूत पेड़ पर बांध देता है। इसके बाद वह आत्महत्या कर लेता है। आत्महत्या करते समय उसको सुकून रहता है कि अब उसके परिवार को कुछ पैसे मिल जाएंगे, जिससे उनका खाने का प्रबंध भी हो जाएगा, राघव की स्कूल की फीस भी भरा जाएगी और उनके लिए नए कपड़े भी आ जाएंगे। अब राघव की हालत रेशमा जैसी नहीं होगी। राघव स्कूल जाएगा, पढ़ाई करेगा और एक अच्छा आदमी बनेगा।उनका जो पढ़ने का सपना पूरा नहीं हो पाया, वो राघव पूरा करेगा। इसी कारण आत्महत्या करते समय उसके चेहरे पर परेशानी की एक लकीर भी नहीं थी। लेकिन उस बेचारे को क्या पता था कि उसने जो सोचा, ऐसा कुछ भी नहीं हुआ।
अगली सुबह जब सरिता उठी तो उसने देखा कि राजीव कहीं भी नहीं है। उसे जल्दी से राघव को उठाया, और उससे कहा कि अपने पापा को आस पड़ोस में देखकर आए। जब दोनों को राजीव कहीं भी नहीं मिला, तब उन्होंने पूरे मोहल्ले वालों को बुलाया और उनसे आग्रह किया कि वो राजीव को ढूंढने में उनकी मदद करें। सभी ने मिलकर राजीव को ढूंढने का प्रयास किया। वह सभी अलग-अलग दिशाओं में जाकर राजीव को ढूंढने लगे। तभी एक पड़ोसी पसीने से तरबतर, भागता-हांफता हुआ आया और घबराते हुए बस इतना ही कह पाया कि वो खेत में है।
सभी लोग उसकी स्थिति देखकर घबरा गए और भागते भागते खेत पहुंचे। राजीव को देखते ही सबके पैरों तले जमीन खिसक गई। सरिता और राघव की तो दुनिया ही उजड़ गई। जैसे-जैसे राजीव की आत्महत्या की खबर फैली, वहां के ऑफिसर-अधिकारियों का भी आना शुरू हो गया। उन्होंने पूरी कागज़ी प्रक्रिया अच्छे से की। लेकिन जिन पैसों के लिए राजीव ने आत्महत्या की थी वह पैसे उसके परिवार वालों को नहीं मिले। राजीव के लिए वह पैसे तो आए थे पर ऑफिसर-अधिकारियों ने वह पैसे खा लिए और उसी दिन राजीव के परिवार वालों को पांच सौ रुपए लाकर दे दिए हैं। मीडिया समाचार पत्र वाले भी आए तो बहुत थे पर एक ख्यात बॉलीवुड सितारे की शादी की खबर के नीचे यह खबर दब गई।
उसी दिन राजीव की अस्थियों को जलाने के बाद जब राघव और सरिता वापस घर लौट रहे थे, तभी ज़ोरदार बारिश आनी शुरू हो गई। वही बारिश, जिसकी राजीव ने दिन रात प्रतीक्षा की, वहीं बारिश जिसमें खेलने के लिए राघव तरस गया। लेकिन अब इसी बारिश में राघव ने क्रिकेट के बल्ले की जगह उठाया हल और चल दिया मैदान की जगह खेत की ओर।
और उस मौसम की उमस के साथ, मर गई एक पत्नी, मर गया एक बच्चा, मर गया उसका बचपना और जन्म हुआ एक नए किसान का, उस बारिश के साथ।
